मंगलवार, 2 दिसंबर 2014

म ....."सावन मनभावन !"



१

सावन मन

सुंदर चितवन

घोर सघन

घटा बन डोलता

हरियाला सावन

२

रिमझिम सी

सावन चांदनी में

बूंदों के झारे

मनभावन सारे

माधुर्यमय प्यारे

३

सावन द्वारे

सपनो भरी शाम

झूलों संग में

बूंदे सुर सजाए

लय तुम्हारे नाम

४

सावन साँझ

मन की अटारी पे

मोर सा नाचा

चांदनी लपेट के

आशिक लगा चाँद

५

बीती यादों ने

देखा जो सावन को

सन्देश भेजा

भिगो दिया मन को

अब तो आजाओ न

६


सावन बूंदे

बादल संग बंधी

धरा पे आयीं

चिड़ियाँ गाने लगीं

बूंदों की थाप पर

डॉ सरस्वती

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